सक्ती: श्री सिद्ध हनुमान मंदिर में 154वीं महाआरती संपन्न, श्रद्धा और भक्ति के साथ उमड़ा जनसैलाब

सक्ती। नगर के प्रमुख आस्था के केंद्र श्री सिद्ध हनुमान मंदिर में 154वीं महाआरती का भव्य आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय पंडित श्री दुर्गेश कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे, जिनके सानिध्य में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ भव्य स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि के भव्य स्वागत के साथ हुआ। हनुमान गेट पर मंदिर के सदस्यों ने पंडित श्री दुर्गेश कुमार पाण्डेय का पुष्प वर्षा कर और चरण स्पर्श कर आत्मीय अभिनंदन किया। जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों के साथ उन्हें मंदिर परिसर तक लाया गया।
मंदिर पहुँचने पर पुजारी ओमप्रकाश वैष्णव ने अतिथि को तिलक लगाकर और चुन्नी भेंट कर उनका स्वागत किया। वहीं, पुजारी की धर्मपत्नी श्रीमती संध्या वैष्णव ने अतिथि की धर्मपत्नी को तिलक लगाकर और मोती की माला पहनाकर सप्रेम स्वागत किया।
दिव्य श्रृंगार और महाआरती का आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व पुजारी जी द्वारा हनुमान जी का दिव्य श्रृंगार किया गया। मंच का संचालन कोडके मौर्य ने कुशलतापूर्वक किया और कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
भक्ति उत्सव के मुख्य चरण इस प्रकार रहे:
गणेश वंदना: सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश की वंदना की गई और पंच दीपक से उनकी आरती उतारी गई।
मातृ शक्ति का योगदान: मातृ शक्ति द्वारा 51 दीपकों की भव्य महाआरती प्रज्वलित की गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा।
महाआरती: प्रथम महाआरती मुख्य अतिथि पंडित दुर्गेश कुमार पाण्डेय द्वारा की गई, जिसके पश्चात बारी-बारी से सभी उपस्थित भक्तों ने आरती कर पुण्य लाभ लिया।
हनुमान चालीसा: आरती के उपरांत भक्तों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया।
आशीर्वचन और सम्मान
महाआरती के पश्चात मुख्य अतिथि को मंदिर के गर्भगृह में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने हनुमान जी के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति की ओर से उन्हें श्री सिद्ध हनुमान जी का छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। पंडित जी ने अपने संक्षिप्त और सारगर्भित आशीर्वचन में भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों ने अतिथि दंपत्ति के साथ सामूहिक छायाचित्र खिंचवाए।
विशेष सूचना:
मंदिर में प्रसाद, श्रृंगार, सिंदुराभिषेक, वस्त्र अर्पण और सुंदरकांड के आयोजन हेतु इच्छुक श्रद्धालु मंदिर के पुजारी जी से संपर्क कर सकते हैं।















